मिरगपुर : ये बाबा फ़कीरादास की धरती है । यहां नॉनवेज और धूम्रपान तो दूर लोग लहसुन प्याज तक से परहेज करते है । जी हां , ये सहारनपुर के पास स्थित गांव मिरगपुर है । जहां कोई व्यक्ति नशा नही करता । हाल ही में मिरगपुर (Miragpur Village) फिर चर्चा में आया जब प्रदेश सरकार की तरफ से इस गांव की प्रसंशा की गई और पवित्र गांव बताया गया । लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष ह्र्दयनारायण दीक्षित एवम स्वामी प्रसाद मौर्य ने मिरगपुर गांव को सम्मानित किया था।
इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स में दर्ज
पिछले कई सौ सालों से नशे से दूर इस गांव के नाम एक और उपलब्धि जुड़ी है । इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स ने मिरगपुर गांव को नशा मुक्त गांव मानते हुए पवित्र गांव का दर्जा दिया है । इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स की तरफ से गांव को इस बाबत पवित्र गांव का सर्टिफिकेट भी दिया गया है ।
500 साल से नशे से दूर
गांव के ही आर्मी में सेवारत युवक अमित गुर्जर मिरगपुर ने बताया कि गांव में बाबा फ़कीरादास के आदेश पर पिछले 500 सालों से यह गांव सभी तरह के व्यसनों से मुक्त है । सभी ग्रामवासी बाबा फ़कीरादास का आदेश मानते आए है । गांव में लहसुन प्याज का सेवन भी नही किया जाता । अपने बड़े बुजुर्गों के बाबा फ़कीरादास से किये वादे को आज भी इस गांव के लोग निभा रहे है .
पूरे देश के लिए प्रेरणा है मिरगपुर
नशे से दूर रहने के कारण देवबंद (Deoband) तहसील का मिरगपुर (Miragpur)गांव पूरे देश के लिए प्रेरणा है जहां पूरी तरह नशाबंदी है । नशामुक्त होना अब इस गांव की पहचान बन चुका है. धार्मिक और आध्यात्मिक गांव की पहचान बना चुका मिरगपुर बाबा फ़कीरादास के सम्मान में हर साल कार्यक्रम का भी आयोजन करता है । इन आयोजनों में नए युवाओ को किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहने की शिक्षा दी जाती है।





